अमित शाह के बस्तर दौरे से पहले नक्सलियों का बड़ा बयान – शांति वार्ता के लिए तैयार, ऑपरेशन रोकने की रखी शर्त!

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जनतंत्र, मध्यप्रदेश, श्रुति घुरैया:

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 5 अप्रैल को प्रस्तावित बस्तर दौरे से पहले नक्सलियों ने चौंकाने वाला बयान जारी किया है। नक्सलियों की केंद्रीय समिति के प्रवक्ता अभय ने एक पर्चा जारी कर ऐलान किया है कि यदि केंद्र और राज्य सरकारें उनके खिलाफ चल रहे सैन्य ऑपरेशन को रोकती हैं, तो वे बिना किसी शर्त के शांति वार्ता के लिए तैयार हैं।

अभय ने स्वीकार किया कि पिछले 15 महीनों में सुरक्षा बलों के अभियानों में उनके 400 से अधिक साथी मारे गए हैं। उन्होंने सरकार से अपील की कि यदि वह वास्तव में नक्सल समस्या के समाधान के लिए गंभीर है, तो उसे तुरंत सैन्य कार्रवाइयों पर रोक लगानी होगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि सरकार द्वारा निरंतर दबाव और हमलों के कारण संगठन को भारी क्षति उठानी पड़ी है, और अब वे एक स्थायी समाधान की ओर बढ़ने के लिए तैयार हैं। इस पर्चे में लिखा गया है कि 24 मार्च को हैदराबाद में संगठन की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई थी, जिसमें यह प्रस्ताव रखा गया कि सरकार से बिना किसी शर्त के बातचीत शुरू की जानी चाहिए और युद्धविराम की घोषणा की जानी चाहिए।

हैदराबाद में हुई नक्सलियों की गुप्त बैठक, शांति वार्ता का फैसला

पर्चे में लिखा है कि 24 मार्च को हैदराबाद में नक्सलियों की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें संगठन ने सरकार के साथ युद्धविराम और बातचीत के लिए आगे आने का निर्णय लिया। इस बैठक में यह तय किया गया कि अगर सरकार सैन्य ऑपरेशन रोकने पर सहमत होती है, तो माओवादी संगठन भी हथियार डालने पर विचार कर सकता है

अभय ने अपने बयान में यह भी स्वीकार किया कि छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री विजय शर्मा ने पहले ही शांति वार्ता के लिए पहल की थी। लेकिन अब तक सरकार ने उनकी शर्तों का कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया था। ऐसे में अब नक्सल संगठन खुद बातचीत के लिए आगे आने को तैयार है

पर्चे में किए गए चौंकाने वाले खुलासे – ऑपरेशन ने तोड़ी नक्सलियों की कमर!

नक्सली प्रवक्ता अभय ने अपने पत्र में सरकार के लगातार हो रहे सैन्य अभियानों को लेकर चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि जब दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के सदस्य और माओवादी संगठन के प्रतिनिधि विकल्प ने पहले ही शांति वार्ता की शर्तें रखी थीं—कि जवानों को सिर्फ कैंप तक सीमित रखा जाए और ऑपरेशन बंद किए जाएं—तब सरकार ने इस प्रस्ताव को अनसुना कर दिया और ऑपरेशन जारी रखा

अभय ने यह भी दावा किया कि –

  • पिछले 15 महीनों में 400 से अधिक माओवादी कमांडर, नेता और PLGA के लड़ाके मारे जा चुके हैं।
  • सैकड़ों नक्सल समर्थकों और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया है।
  • लगातार सैन्य ऑपरेशन के कारण संगठन को भारी क्षति हुई है, जिसके चलते अब सरकार से बातचीत की पहल करनी पड़ रही है।

नक्सलियों की सरकार के सामने 3 प्रमुख मांगें!

नक्सल संगठन ने केंद्र और राज्य सरकारों से 3 मुख्य शर्तें रखी हैं, जिन पर अमल होने के बाद वे युद्धविराम की घोषणा करने को तैयार हैं—

  • छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र (गढ़चिरौली), ओडिशा, झारखंड, मध्य प्रदेश और तेलंगाना में सभी सैन्य ऑपरेशन तुरंत रोके जाएं।
  • नए सुरक्षाबलों के कैंप लगाने पर प्रतिबंध लगाया जाए।
  • नक्सल प्रभावित इलाकों में कथित ‘नरसंहार’ और ‘मनमानी हत्याओं’ को रोका जाए।

अभय ने कहा कि अगर सरकार इन मांगों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देती है, तो हम बिना किसी शर्त के युद्धविराम घोषित करने को तैयार हैं

हालांकि, अमित शाह पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि 2026 तक देश से नक्सलवाद का पूरी तरह सफाया कर दिया जाएगा। अगस्त 2024 और दिसंबर 2024 में छत्तीसगढ़ के रायपुर और जगदलपुर में अपने भाषणों में शाह ने चेतावनी दी थी कि “जो हथियार डालेंगे, उन्हें गले लगाया जाएगा, लेकिन जो हिंसा करेंगे, उन्हें मारा जाएगा।”

इस बयान के बाद से बस्तर में नक्सल विरोधी ऑपरेशन बेहद आक्रामक हो गए हैं, जिससे माओवादी संगठन को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस नए प्रस्ताव को स्वीकार करेगी या अपने सख्त रुख पर कायम रहेगी।

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