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कर्नाटक में पिछले एक साल से चल रहा राजनीतिक ड्रामा अब खत्म होने की कगार पर है. दिल्‍ली में हुई हाईकमान के साथ बैठक में नए राजनीतिक समीकरण तय किए गए हैं. इसके साथ ही कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया आज यानी कि 28 मई को अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं. उन्‍होंने इस बात का ऐलान अपनी कैबिनेट बैठक में किया है. कांग्रेस विधायक अशोक पत्तन के मानें तो डीके शिवकुमार को अब कर्नाटक का मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है. इसके साथ सरकार के मंत्रिमंडल में भी फेरबदल होने के पूरे आसार हैं. कर्नाटक कांग्रेस इंचार्ज रणदीप सुरजेवाला भी बेंगलुरु में ही मौजूद हैं. कांग्रेस हाईकमान ने यह फैसला कांग्रेस में बगावत रोकने के लिया है. डीके शिवकुमार ने भले ही खुलकर कभी बगावत का ऐलान न किया और हमेशा पार्टी के साथ रहने की बात कही हो. लेकिन समय-समय पर उनके विधायक ये मांग करते रहे हैं कि सरकार गठन के समय तय हुई बात के अनुसार डीके शिवकुमार को सीएम बनाया जाना चाहिए. कई बार ऐसे मौके आए जब लगा कि अब डीके कांग्रेस से बगावत कर सकते हैं. क्‍यों कर्नाटक में बदला जा रहा सीएम साल 2023 में हुए विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को जीत मिली थी. उस समय भी सिद्धारमैया और डीके के बीच सीएम पद को लेकर नोकझोंक हुई थी. इसको देखते हुए तब राहुल गांधी ने रोटेशनल सीएम फॉर्मूला तय किया था. उसके अनुसार 2.5 सिद्धारमैया सीएम पद पर रहेंगे और उसके बाद डीके शिवकुमार सीएम पद पर रहेंगे. हालांकि 3 साल सरकार गठन के बाद यह रोटेशन फॉर्मूला लागू नहीं हो पाया. यही वजह है कि लगभग हर महीने कांग्रेस विधायक दिल्ली में इसको लागू कराए जाने को लेकर डेरा डाले रहते थे. इसके अलावा पार्टी हाईकमान का मानना है कि समय रहते नेतृत्व बदलने से मंत्रियों के खिलाफ पैदा हो रही ‘एंटी-इंकम्बेंसी’ को खत्म किया जा सकता है. मतलब यह कि कांग्रेस अन्‍य राज्‍यों की तरह अब बगावत होने नहीं देना चाहती है. यही वजह है कि इस रोटेशनल सीएम फॉर्मूले को लागू किया जा रहा है. कई बार दिए बगावत के संकेत कर्नाटक में पिछले एक साल से सीएम पद को लेकर खींचतान जारी है. यह खींचतान 30 जून 2025 को शुरू हुई थी. जब शिवकुमार के गुट वाले विधायकों ने मांग की थी कि अब डीके को सीएम बनाना चाहिए. हालांकि उस समय बातचीत के जरिए मामला शांत करा दिया गया था. लेकिन यह मामला शांत नहीं हुआ जुलाई आते आते फ‍िर सीएम पद को लेकर चर्चाएं तेज हो गई. इसके बाद सिद्धारमैया और डीके दिल्‍ली पहुंचे. हाईकमान से मुलाकात के बाद बयान जारी कि‍या गया कि सब कुछ ठीक है. हाईकमान की कोशिश रही कि जैसा चल रहा है वैसा ही चलता रहे. लेकिन ऐसा नहीं हो पाया. नवंबर में ढाई साल पूरे होने के बाद विधायकों ने दिल्ली कूच करना शुरू कर द‍िया और इस मांग को तेज कर दिया कि रोटेशन फार्मूला लागू किया जाए. हालांकि इन सब के दौरान शिवकुमार सब कुछ ठीक होने और समय का इंतजार करने की बात कहते नजर आए. 26 मई को दिल्ली में हुई हाईकमान की बैठक में तय किया गया कि सिद्धारमैया अपने पद से इस्तीफा देंगे. बैठक के बाद पीसी में ही श‍िवकुमार की मुस्कान ने बता द‍िया था कि अब उनका इंतजार खत्म होने वाला है. ठीक वैसा ही एक दिन बाद ही सिद्धारमैया ने इस्तीफे का ऐलान कर दिया.

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कर्नाटक में पिछले एक साल से चल रहा राजनीतिक ड्रामा अब खत्म होने की कगार पर है. दिल्‍ली में हुई हाईकमान के साथ बैठक में नए राजनीतिक समीकरण तय किए गए हैं. इसके साथ ही कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया आज यानी कि 28 मई को अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं. उन्‍होंने इस बात का ऐलान अपनी कैबिनेट बैठक में किया है. कांग्रेस विधायक अशोक पत्तन के मानें तो डीके शिवकुमार को अब कर्नाटक का मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है. इसके साथ सरकार के मंत्रिमंडल में भी फेरबदल होने के पूरे आसार हैं. कर्नाटक कांग्रेस इंचार्ज रणदीप सुरजेवाला भी बेंगलुरु में ही मौजूद हैं. कांग्रेस हाईकमान ने यह फैसला कांग्रेस में बगावत रोकने के लिया है. डीके शिवकुमार ने भले ही खुलकर कभी बगावत का ऐलान न किया और हमेशा पार्टी के साथ रहने की बात कही हो. लेकिन समय-समय पर उनके विधायक ये मांग करते रहे हैं कि सरकार गठन के समय तय हुई बात के अनुसार डीके शिवकुमार को सीएम बनाया जाना चाहिए. कई बार ऐसे मौके आए जब लगा कि अब डीके कांग्रेस से बगावत कर सकते हैं. क्‍यों कर्नाटक में बदला जा रहा सीएम साल 2023 में हुए विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को जीत मिली थी. उस समय भी सिद्धारमैया और डीके के बीच सीएम पद को लेकर नोकझोंक हुई थी. इसको देखते हुए तब राहुल गांधी ने रोटेशनल सीएम फॉर्मूला तय किया था. उसके अनुसार 2.5 सिद्धारमैया सीएम पद पर रहेंगे और उसके बाद डीके शिवकुमार सीएम पद पर रहेंगे. हालांकि 3 साल सरकार गठन के बाद यह रोटेशन फॉर्मूला लागू नहीं हो पाया. यही वजह है कि लगभग हर महीने कांग्रेस विधायक दिल्ली में इसको लागू कराए जाने को लेकर डेरा डाले रहते थे. इसके अलावा पार्टी हाईकमान का मानना है कि समय रहते नेतृत्व बदलने से मंत्रियों के खिलाफ पैदा हो रही ‘एंटी-इंकम्बेंसी’ को खत्म किया जा सकता है. मतलब यह कि कांग्रेस अन्‍य राज्‍यों की तरह अब बगावत होने नहीं देना चाहती है. यही वजह है कि इस रोटेशनल सीएम फॉर्मूले को लागू किया जा रहा है. कई बार दिए बगावत के संकेत कर्नाटक में पिछले एक साल से सीएम पद को लेकर खींचतान जारी है. यह खींचतान 30 जून 2025 को शुरू हुई थी. जब शिवकुमार के गुट वाले विधायकों ने मांग की थी कि अब डीके को सीएम बनाना चाहिए. हालांकि उस समय बातचीत के जरिए मामला शांत करा दिया गया था. लेकिन यह मामला शांत नहीं हुआ जुलाई आते आते फ‍िर सीएम पद को लेकर चर्चाएं तेज हो गई. इसके बाद सिद्धारमैया और डीके दिल्‍ली पहुंचे. हाईकमान से मुलाकात के बाद बयान जारी कि‍या गया कि सब कुछ ठीक है. हाईकमान की कोशिश रही कि जैसा चल रहा है वैसा ही चलता रहे. लेकिन ऐसा नहीं हो पाया. नवंबर में ढाई साल पूरे होने के बाद विधायकों ने दिल्ली कूच करना शुरू कर द‍िया और इस मांग को तेज कर दिया कि रोटेशन फार्मूला लागू किया जाए. हालांकि इन सब के दौरान शिवकुमार सब कुछ ठीक होने और समय का इंतजार करने की बात कहते नजर आए. 26 मई को दिल्ली में हुई हाईकमान की बैठक में तय किया गया कि सिद्धारमैया अपने पद से इस्तीफा देंगे. बैठक के बाद पीसी में ही श‍िवकुमार की मुस्कान ने बता द‍िया था कि अब उनका इंतजार खत्म होने वाला है. ठीक वैसा ही एक दिन बाद ही सिद्धारमैया ने इस्तीफे का ऐलान कर दिया.

कर्नाटक में पिछले एक साल से चल रहा राजनीतिक ड्रामा अब खत्म होने की कगार पर है. दिल्‍ली में हुई हाईकमान के साथ बैठक में नए राजनीतिक समीकरण तय किए गए हैं. इसके साथ ही कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया आज यानी कि 28 मई को अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं. उन्‍होंने इस बात का ऐलान अपनी कैबिनेट बैठक में किया है. कांग्रेस विधायक अशोक पत्तन के मानें तो डीके शिवकुमार को अब कर्नाटक का मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है. इसके साथ सरकार के मंत्रिमंडल में भी फेरबदल होने के पूरे आसार हैं. कर्नाटक कांग्रेस इंचार्ज रणदीप सुरजेवाला भी बेंगलुरु में ही मौजूद हैं. कांग्रेस हाईकमान ने यह फैसला कांग्रेस में बगावत रोकने के लिया है. डीके शिवकुमार ने भले ही खुलकर कभी बगावत का ऐलान न किया और हमेशा पार्टी के साथ रहने की बात कही हो. लेकिन समय-समय पर उनके विधायक ये मांग करते रहे हैं कि सरकार गठन के समय तय हुई बात के अनुसार डीके शिवकुमार को सीएम बनाया जाना चाहिए. कई बार ऐसे मौके आए जब लगा कि अब डीके कांग्रेस से बगावत कर सकते हैं. क्‍यों कर्नाटक में बदला जा रहा सीएम साल 2023 में हुए विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को जीत मिली थी. उस समय भी सिद्धारमैया और डीके के बीच सीएम पद को लेकर नोकझोंक हुई थी. इसको देखते हुए तब राहुल गांधी ने रोटेशनल सीएम फॉर्मूला तय किया था. उसके अनुसार 2.5 सिद्धारमैया सीएम पद पर रहेंगे और उसके बाद डीके शिवकुमार सीएम पद पर रहेंगे. हालांकि 3 साल सरकार गठन के बाद यह रोटेशन फॉर्मूला लागू नहीं हो पाया. यही वजह है कि लगभग हर महीने कांग्रेस विधायक दिल्ली में इसको लागू कराए जाने को लेकर डेरा डाले रहते थे. इसके अलावा पार्टी हाईकमान का मानना है कि समय रहते नेतृत्व बदलने से मंत्रियों के खिलाफ पैदा हो रही ‘एंटी-इंकम्बेंसी’ को खत्म किया जा सकता है. मतलब यह कि कांग्रेस अन्‍य राज्‍यों की तरह अब बगावत होने नहीं देना चाहती है. यही वजह है कि इस रोटेशनल सीएम फॉर्मूले को लागू किया जा रहा है. कई बार दिए बगावत के संकेत कर्नाटक में पिछले एक साल से सीएम पद को लेकर खींचतान जारी है. यह खींचतान 30 जून 2025 को शुरू हुई थी. जब शिवकुमार के गुट वाले विधायकों ने मांग की थी कि अब डीके को सीएम बनाना चाहिए. हालांकि उस समय बातचीत के जरिए मामला शांत करा दिया गया था. लेकिन यह मामला शांत नहीं हुआ जुलाई आते आते फ‍िर सीएम पद को लेकर चर्चाएं तेज हो गई. इसके बाद सिद्धारमैया और डीके दिल्‍ली पहुंचे. हाईकमान से मुलाकात के बाद बयान जारी कि‍या गया कि सब कुछ ठीक है. हाईकमान की कोशिश रही कि जैसा चल रहा है वैसा ही चलता रहे. लेकिन ऐसा नहीं हो पाया. नवंबर में ढाई साल पूरे होने के बाद विधायकों ने दिल्ली कूच करना शुरू कर द‍िया और इस मांग को तेज कर दिया कि रोटेशन फार्मूला लागू किया जाए. हालांकि इन सब के दौरान शिवकुमार सब कुछ ठीक होने और समय का इंतजार करने की बात कहते नजर आए. 26 मई को दिल्ली में हुई हाईकमान की बैठक में तय किया गया कि सिद्धारमैया अपने पद से इस्तीफा देंगे. बैठक के बाद पीसी में ही श‍िवकुमार की मुस्कान ने बता द‍िया था कि अब उनका इंतजार खत्म होने वाला है. ठीक वैसा ही एक दिन बाद ही सिद्धारमैया ने इस्तीफे का ऐलान कर दिया.

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