छह शूटरों ने बरसाईं गोलियां, पंचायत खत्म होते ही दो सगे भाइयों की हत्या; 28 कारतूस बरामद

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मुरैना जिले के सुमावली थाना क्षेत्र के हटूपुरा गांव में सरकारी जमीन को लेकर लंबे समय से चला आ रहा विवाद रविवार को खूनी संघर्ष में बदल गया। पंचायत समाप्त होने के कुछ ही समय बाद दो सगे भाइयों की गोली मारकर हत्या कर दी गई, जबकि परिवार के दो अन्य सदस्य गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल है और पुलिस ने इलाके में अतिरिक्त बल तैनात कर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हमलावर पहले से ही हमले की तैयारी कर चुके थे और मौके की तलाश में छिपकर बैठे थे।

परिजनों का आरोप है कि यह वारदात अचानक नहीं हुई, बल्कि पूरी योजना के साथ अंजाम दी गई। उनका कहना है कि घटना से एक रात पहले आरोपी पक्ष ने गांव के बाहर से छह शूटरों को बुलाकर अपने घर में ठहराया था। रविवार सुबह पंचायत खत्म होते ही ये लोग छत और पत्थर की बाउंड्री की आड़ से बाहर निकले और राजवीर गुर्जर, अजब सिंह गुर्जर, धीरेंद्र गुर्जर तथा विकास पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। इस हमले में राजवीर और अजब सिंह की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि धीरेंद्र और विकास गंभीर रूप से घायल हो गए।

पुलिस के अनुसार घटनास्थल से अब तक कुल 28 कारतूस बरामद किए गए हैं, जिनमें .315 बोर के 22 और 12 बोर के 6 कारतूस शामिल हैं। भारी संख्या में चली गोलियों से यह स्पष्ट होता है कि हमलावर पूरी तैयारी के साथ पहुंचे थे। घायलों को गंभीर हालत में ग्वालियर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार जारी है। पुलिस मामले की हर पहलू से जांच कर रही है ताकि घटना की पूरी सच्चाई सामने लाई जा सके।

जानकारी के मुताबिक, विवाद सरकारी जमीन पर कब्जे को लेकर था। गांव के बाहर मुख्य सड़क के दोनों ओर स्थित सरकारी भूमि पर दोनों पक्ष अपना-अपना दावा कर रहे थे। एक पक्ष पहले से मकान बनाकर रह रहा था, जबकि दूसरा पक्ष भी उसी जमीन पर निर्माण करना चाहता था। इसी बात को लेकर दोनों परिवारों के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ था। कई बार पंचायत और पुलिस स्तर पर मामला पहुंचा, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल सका, जिससे विवाद लगातार बढ़ता गया।

ग्रामीणों ने बताया कि शनिवार को दोनों पक्षों के बीच पंचायत बुलाई गई थी, जिसमें सभी को अपने-अपने कब्जे वाले हिस्से तक सीमित रहने की सलाह दी गई थी। रविवार सुबह दोबारा पंचायत हुई और पहले वाला फैसला ही दोहराया गया। परिजनों का कहना है कि पंचायत खत्म होने के तुरंत बाद पहले से घात लगाए बैठे हथियारबंद लोगों ने अचानक फायरिंग शुरू कर दी। किसी को संभलने का मौका नहीं मिला और देखते ही देखते पूरा घटनास्थल गोलियों की आवाज से गूंज उठा।

मृतकों के परिजनों का आरोप है कि शनिवार रात ही आरोपियों ने फायरिंग कर जान से मारने की धमकी दी थी। इस संबंध में सुमावली थाने में लिखित शिकायत भी दी गई थी। उनका कहना है कि पुलिस गांव तो पहुंची, लेकिन केवल औपचारिक कार्रवाई कर लौट गई। यदि उसी समय सख्त कार्रवाई करते हुए आरोपियों की तलाशी ली जाती या उन्हें हिरासत में लिया जाता, तो रविवार की यह बड़ी वारदात टाली जा सकती थी। इसी कारण परिजन पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठा रहे हैं।

परिजनों का यह भी कहना है कि शिकायत पत्र में सरकारी जमीन के विवाद, झगड़े की आशंका और जान से मारने की धमकी का स्पष्ट उल्लेख किया गया था। उन्होंने समय रहते सुरक्षा और कानूनी कार्रवाई की मांग भी की थी, लेकिन अपेक्षित कदम नहीं उठाए गए। अब दो लोगों की जान जाने के बाद परिवार का कहना है कि यदि पहले ही प्रभावी कार्रवाई होती तो यह स्थिति पैदा नहीं होती। घटना के बाद परिवार में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।

मृतकों के परिजनों ने मुख्य आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की है। उनका कहना है कि आरोपी अब भी खुलेआम घूम रहे हैं, जिससे परिवार और गांव के लोग डरे हुए हैं। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई, परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। ग्रामीणों का भी मानना है कि प्रशासन को इस मामले में तेजी से कार्रवाई करनी चाहिए ताकि लोगों का कानून पर विश्वास बना रहे।

घटना के लगभग 24 घंटे बाद एफएसएल टीम ने मौके पर पहुंचकर वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य एकत्र किए। पुलिस का मानना है कि घटनास्थल पर मौजूद कुछ कारतूस आसपास के लोगों या बच्चों द्वारा भी उठा लिए गए होंगे, इसलिए हर पहलू की बारीकी से जांच की जा रही है। पुलिस की कई टीमें आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दे रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि घटना से पहले मिली शिकायत और उस पर की गई पुलिस कार्रवाई की भी जांच होगी तथा यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।