मध्यप्रदेश के धार स्थित भोजशाला परिसर के पीछे शुक्रवार को जुमे की नमाज उस वैकल्पिक स्थल पर अदा की गई, जिसे सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद प्रशासन ने निर्धारित किया था। नमाज भोजशाला की बाउंड्रीवॉल से सटी खसरा नंबर 612 की जमीन पर पढ़ी गई। सुबह से ही प्रशासनिक अमला मौके पर सक्रिय रहा और पूरे क्षेत्र में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए। पुलिस बल की तैनाती के साथ बैरिकेडिंग कर लोगों की आवाजाही को नियंत्रित किया गया ताकि नमाज शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।
सुबह भारी बारिश के कारण तय की गई खसरा नंबर 611 की जमीन पर कीचड़ और पानी भर गया था। इसके बाद प्रशासन ने जेसीबी मशीनों की मदद से पास की जमीन को समतल कराया। गीली मिट्टी पर तिरपाल बिछाए गए और नमाजियों के बैठने के लिए अस्थायी व्यवस्था की गई। प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं पर लगातार निगरानी रखी।
नमाज से पहले स्थानीय रहवासियों ने इस जमीन को लेकर आपत्ति दर्ज कराई। उनका कहना था कि जिस स्थान पर नमाज की अनुमति दी गई है, वह निजी और पुश्तैनी खेती की जमीन है। ग्रामीणों ने दावा किया कि वे लंबे समय से इस भूमि पर खेती करते आ रहे हैं और प्रशासन ने उन्हें पूर्व सूचना नहीं दी। कुछ लोगों ने कहा कि यदि उनकी आपत्तियों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे कानूनी रास्ता अपनाएंगे।
विरोध की सूचना मिलने पर एसडीएम राजकुमार हलदर प्रशासनिक टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने स्थानीय लोगों से चर्चा की और भरोसा दिलाया कि उनकी आपत्तियों को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा। अधिकारियों ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करते हुए आगे की कार्रवाई की जाएगी और स्थिति को शांतिपूर्ण बनाए रखना प्राथमिकता है।
कमाल मौला वेलफेयर सोसायटी के प्रतिनिधि अब्दुल समद ने बताया कि बारिश के कारण खसरा नंबर 611 पर नमाज पढ़ना संभव नहीं था। आपसी सहमति से खसरा नंबर 612 को अस्थायी रूप से चुना गया क्योंकि यह कमाल मौला मस्जिद से सटा हुआ है और वहां से मस्जिद सीधे दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था केवल वर्तमान परिस्थिति को देखते हुए की गई है।


अब्दुल समद ने यह भी कहा कि यदि अगले शुक्रवार तक अदालत का कोई नया अंतरिम या अंतिम आदेश आता है तो मुस्लिम पक्ष और प्रशासन दोनों उसका पालन करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप शांतिपूर्ण ढंग से धार्मिक गतिविधि संपन्न करना है। साथ ही उन्होंने वजू के लिए पानी, सुरक्षित पहुंच मार्ग और यातायात व्यवस्था की मांग भी प्रशासन से की थी।
दोपहर करीब एक बजे से नमाजी निर्धारित स्थल पर पहुंचने लगे। बैरिकेडिंग के भीतर नमाज की व्यवस्था की गई और पुलिस बल पूरे समय मौजूद रहा। प्रशासनिक अधिकारियों ने पूरे कार्यक्रम पर नजर रखी ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो। बारिश के बावजूद नमाज शांतिपूर्वक संपन्न होने की जानकारी दी गई।
यह मामला सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के बाद महत्वपूर्ण हुआ, जिसमें भोजशाला से सटे क्षेत्र में शुक्रवार की नमाज के लिए वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने को कहा गया था। 30 जुलाई को अदालत ने स्पष्ट किया था कि नमाज के लिए निर्धारित भूखंड तक अलग रास्ते से पहुंचा जा सकता है और राज्य सरकार आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करे। अदालत ने यह भी कहा था कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना राज्य का संवैधानिक दायित्व है।
इससे पहले जिला प्रशासन ने मालीवाड़ा गांव स्थित चालीसपीर दरगाह के पास वैकल्पिक स्थान तय किया था, लेकिन मुस्लिम समाज ने उसे स्वीकार नहीं किया था। उनका कहना था कि वह स्थान भोजशाला से काफी दूर है और अदालत की भावना के अनुरूप नहीं है। इसके बाद मामला फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां भोजशाला से सटे क्षेत्र में व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए।
शुक्रवार की पूरी कार्रवाई के दौरान प्रशासन, पुलिस और दोनों पक्षों के प्रतिनिधि लगातार संपर्क में रहे। अधिकारियों ने कहा कि फिलहाल अदालत के निर्देशों के अनुसार व्यवस्था लागू की गई है और भविष्य में यदि कोई नया आदेश या आपसी सहमति से कोई अन्य उपयुक्त स्थान तय होता है, तो उसी के अनुसार आगे की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। पूरे घटनाक्रम के केंद्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखना, न्यायालय के आदेशों का पालन करना और स्थानीय आपत्तियों को दर्ज कर प्रशासनिक स्तर पर विचार करना प्रमुख मुद्दे रहे।

