जनतंत्र, मध्यप्रदेश, श्रुति घुरैया:
मध्य प्रदेश कांग्रेस संगठन को नई दिशा देने के लिए आज दिल्ली स्थित कांग्रेस के नए मुख्यालय में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई है। इस बैठक में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, मध्य प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी और पीसीसी चीफ जीतू पटवारी समेत कई वरिष्ठ नेता उपस्थित रहेंगे। बैठक में मध्य प्रदेश के सभी जिला अध्यक्ष भी शामिल होंगे, जिनकी भूमिका और अधिकार बढ़ाने को लेकर मंथन किया जाएगा।
संगठन को फिर से खड़ा करने की कवायद, खड़गे-राहुल देंगे रणनीतिक दिशा
मध्य प्रदेश में कांग्रेस 2003 से लगातार चुनावी हार का सामना कर रही है। 2018 में कमलनाथ के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार जरूर बनी थी, लेकिन 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया के बागी तेवर और 22 विधायकों के दलबदल के कारण सरकार गिर गई। इसके बाद से ही कांग्रेस को जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के पलायन, कमजोर संगठन और नेतृत्व संकट जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
आज की बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी जिला अध्यक्षों से सीधा संवाद करेंगे और संगठन की मजबूती को लेकर उनकी राय लेंगे। कांग्रेस अब संगठन को किसी एक बड़े नेता पर केंद्रित करने के बजाय जिला स्तर से मजबूत करने की रणनीति अपना रही है। बता दें, आज की बैठक में जो प्रस्ताव तैयार होगा, उसे 9 अप्रैल को गुजरात के अहमदाबाद में कांग्रेस के राष्ट्रीय अधिवेशन में पेश किया जाएगा। वहां इस प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लगेगी, जिसके बाद इसे पूरे देश में लागू किया जा सकता है। कांग्रेस जिला स्तर पर संगठन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए नए अधिकार देने पर विचार कर रही है।
इसके अलावा, मध्य प्रदेश कांग्रेस ने पार्षद से लेकर सांसद तक के टिकट वितरण में जिला अध्यक्षों की भूमिका अनिवार्य करने का प्रस्ताव रखा है। यह कदम इसलिए उठाया जा रहा है, ताकि जिला स्तर के नेता अपने क्षेत्र में मजबूत पकड़ बना सकें और स्थानीय कार्यकर्ताओं की राय को महत्व दिया जा सके। बता दें, मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने लगातार चार विधानसभा चुनाव हारे हैं। 2018 में सरकार बनी, लेकिन 2020 में बगावत के कारण गिर गई। खासकर जिन विधानसभा क्षेत्रों में विधायकों ने पार्टी छोड़ी, वहां बूथ स्तर तक का पूरा संगठन कमजोर पड़ गया। उपचुनावों में कांग्रेस को कई क्षेत्रों में बिना मजबूत कार्यकर्ताओं के ही चुनाव लड़ना पड़ा, जिसके कारण हार का सामना करना पड़ा।
अब कांग्रेस दल-बदल की घटनाओं से सबक लेते हुए संगठन को केवल नेताओं और व्यक्तियों पर केंद्रित करने के बजाय जिला अध्यक्षों को सशक्त बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। इससे स्थानीय स्तर पर पार्टी को मजबूत आधार मिल सकेगा और हर जिले का संगठन खुद फैसले लेने में सक्षम होगा।
बता दें, मध्य प्रदेश के अलावा, राजस्थान, गुजरात, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, पंजाब, चंडीगढ़ और दिल्ली के जिला अध्यक्षों की बैठक भी आज दिल्ली में होगी। कांग्रेस ने 27 मार्च से पूरे देश में 250-250 जिला अध्यक्षों के बैच में बैठकें आयोजित करने की योजना बनाई है। इन बैठकों में संगठन की मजबूती को लेकर विचार-विमर्श किया जा रहा है।