देशभक्ति के प्रतीक मनोज कुमार पंचतत्व में विलीन, राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार; अमिताभ-सलीम खान समेत फिल्म जगत ने दी श्रद्धांजलि

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जनतंत्र, मध्यप्रदेश, श्रुति घुरैया:

मुंबई में शनिवार का दिन भारतीय सिनेमा के एक सुनहरे अध्याय को विदाई देने वाला साबित हुआ। देशभक्ति की भावना को परदे पर जीवंत करने वाले अभिनेता-निर्देशक मनोज कुमार का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ जुहू के पवनहंस श्मशान घाट पर किया गया। जैसे ही उनके पार्थिव शरीर को तिरंगे में लपेटकर श्मशान घाट लाया गया, वहां मौजूद हर आंख नम हो उठी। 21 तोपों की सलामी के बीच जब बेटे कुणाल गोस्वामी ने उन्हें मुखाग्नि दी, तो पूरे माहौल में एक गहरा सन्नाटा छा गया—यह केवल एक अभिनेता का विदा होना नहीं था, बल्कि ‘भारत कुमार’ की अंतिम यात्रा थी, जिसने सिनेमा के माध्यम से देशभक्ति को जन-जन तक पहुंचाया।

अंतिम संस्कार में बॉलीवुड के कई दिग्गज सितारे मौजूद रहे। अमिताभ बच्चन, बेटे अभिषेक बच्चन के साथ पहुंचे, वहीं प्रेम चोपड़ा, सलीम खान, सुभाष घई जैसे कई वरिष्ठ कलाकारों ने ‘भारत कुमार’ को अंतिम विदाई दी। प्रेम चोपड़ा जब अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे, तो उनकी आंखों में पुराने दौर की यादें साफ झलक रही थीं। लाठी के सहारे चलते हुए, कमर पर पट्टा बांधे, वे एक ऐसे युग की झलक लेकर आए, जो अब सिर्फ यादों में रह गया है।

मनोज कुमार का शुक्रवार सुबह 87 वर्ष की उम्र में मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में निधन हुआ था। वे लंबे समय से लिवर सिरोसिस से जूझ रहे थे और 21 फरवरी 2025 को अस्पताल में भर्ती हुए थे। उनके निधन के साथ ही भारतीय सिनेमा ने वो आवाज खो दी जो पर्दे पर ‘जय जवान जय किसान’ का नारा बुलंद करती थी।

उनकी फिल्में—उपकार, पूरब और पश्चिम, रोटी कपड़ा और मकान, और क्रांति—सिर्फ सिनेमा नहीं थीं, वो एक विचार थीं, एक आंदोलन थीं, जिसने देश की आत्मा को छू लिया था। मनोज कुमार का व्यक्तित्व, उनका सिनेमा और उनके संवाद भारतीय दर्शकों के दिलों में अमर रहेंगे।

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