36 साल पुराने सरला भट्ट हत्याकांड में यासीन मलिक समेत 5 पर चार्जशीट: आरोप- कश्मीरी पंडित नर्स का अपहरण कर 4 दिन तक किया टॉर्चर, फिर गोली मारकर हत्या

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कश्मीरी पंडित स्टाफ नर्स सरला भट्ट के अपहरण और हत्या के 36 साल पुराने मामले में जम्मू-कश्मीर की स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) ने कोर्ट में 737 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट दाखिल की है। चार्जशीट में जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के तत्कालीन चीफ कमांडर यासीन मलिक समेत पांच लोगों को आरोपी बनाया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार, सरला भट्ट के अपहरण, यातना और हत्या की पूरी साजिश इन आरोपियों ने मिलकर रची थी।

चार्जशीट के मुताबिक, 18 अप्रैल 1990 को अनंतनाग निवासी 27 वर्षीय सरला भट्ट श्रीनगर स्थित शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SKIMS) में अपनी ड्यूटी के लिए जा रही थीं। इसी दौरान अस्पताल परिसर के पास से उनका अपहरण कर लिया गया। उन्हें चार दिनों तक अलग-अलग ठिकानों पर बंधक बनाकर रखा गया, जहां कथित तौर पर बेरहमी से प्रताड़ित किया गया। इसके बाद उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई। चार दिन बाद उनका शव श्रीनगर के डाउनटाउन इलाके से बरामद हुआ, जिस पर गोलियों और यातना के कई निशान मिले थे।

जांच में सामने आया कि शव के पास छोड़े गए एक नोट में सरला भट्ट पर सुरक्षाबलों का मुखबिर होने का आरोप लगाया गया था। घटना के बाद आतंकियों ने उनके घर पर ग्रेनेड भी फेंका, जिसके चलते उनका परिवार घाटी छोड़ने के लिए मजबूर हो गया। SIA का कहना है कि हत्या का मकसद उन्हें कथित मुखबिरी के शक में निशाना बनाना था।

चार्जशीट के अनुसार, मुख्य शूटर खुर्शीद अहमद चालको अभी भी फरार है और उसके पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में छिपे होने की आशंका है। वहीं, मामले के तीन अन्य आरोपी—अब्दुल हमीद शेख, मोहम्मद यूसुफ सोफी उर्फ इदरीस और गुलाम मोहम्मद टपलू—की मौत हो चुकी है। यासीन मलिक फिलहाल आतंकी फंडिंग से जुड़े एक अन्य मामले में तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहा है।

मार्च 2024 में यह मामला SIA को सौंपा गया था। एजेंसी ने करीब दो वर्षों तक गहन जांच करते हुए पुराने रिकॉर्ड खंगाले, कई स्थानों पर छापेमारी की, गवाहों के बयान दर्ज किए और मेडिकल, फोरेंसिक, बैलिस्टिक, दस्तावेजी तथा इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जुटाए। इन्हीं सबूतों के आधार पर 737 पन्नों की चार्जशीट तैयार की गई। पांचों आरोपियों के खिलाफ हत्या, अपहरण, आपराधिक साजिश, सबूत मिटाने सहित कई गंभीर धाराओं के अलावा TADA और आर्म्स एक्ट के तहत भी आरोप लगाए गए हैं।