चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर 23 विपक्षी दलों और एक निर्दलीय राज्यसभा सांसद ने मंगलवार को भारत के चीफ जस्टिस (CJI) को संयुक्त पत्र भेजकर हस्तक्षेप की मांग की है। विपक्षी दलों का आरोप है कि SIR की मौजूदा प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है और इससे बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाने का खतरा पैदा हो गया है।

पत्र पर कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (TMC), द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) समेत 23 विपक्षी दलों के नेताओं और निर्दलीय सांसद कपिल सिब्बल ने हस्ताक्षर किए हैं। सूत्रों के अनुसार, हस्ताक्षर करने वालों में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, राजद नेता तेजस्वी यादव, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और वामपंथी दलों के वरिष्ठ नेता भी शामिल हैं।
DMK के प्रवक्ता सरवनन अन्नादुरई ने कहा कि SIR प्रक्रिया पूरी तरह मनमानी और लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची से लोगों के नाम हटाना बन गया है, जबकि लोकतांत्रिक व्यवस्था का मूल सिद्धांत प्रत्येक पात्र वयस्क नागरिक को मतदान का अधिकार सुनिश्चित करना है।

विपक्षी दलों ने अपने पत्र में कहा है कि जब संवैधानिक संस्थाएं अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन अपेक्षित तरीके से नहीं कर पातीं, तब देश के नागरिक न्यायपालिका से निष्पक्ष हस्तक्षेप की उम्मीद करते हैं। पत्र में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा गया कि SIR प्रक्रिया का असर कई राज्यों के मतदाताओं पर पड़ रहा है और इसकी निष्पक्षता की न्यायिक समीक्षा कराई जानी चाहिए।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि विपक्षी दलों ने पहले ही इस मुद्दे पर संयुक्त रणनीति बनाने का फैसला किया था। उनका कहना है कि सभी दल लोकतांत्रिक प्रक्रिया और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होकर आगे बढ़ रहे हैं।
वहीं तृणमूल कांग्रेस की सांसद सागरिका घोष ने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया का इस्तेमाल चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने और सत्तारूढ़ दल को राजनीतिक लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसी कारण विपक्षी दलों ने पहली बार इतनी बड़ी संख्या में एकजुट होकर CJI से इस पूरे मामले की न्यायिक समीक्षा कराने और चुनाव आयोग की प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की मांग की है।