लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला सोमवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों के राष्ट्रवादी सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय के प्रस्ताव पर बड़ा फैसला ले सकते हैं। संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से पहले इस मामले में लोकसभा अध्यक्ष की घोषणा पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
सूत्रों के मुताबिक, टीएमसी के इन बागी सांसदों ने पार्टी से अलग होकर NCPI में शामिल होने का दावा किया है। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष के सामने अपनी अलग पहचान और संसदीय मान्यता को लेकर आवेदन दिया था।
इन सांसदों का कहना है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन के बाद उन्होंने अलग राजनीतिक रास्ता अपनाने का फैसला किया। अब वे NCPI के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं और भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन में शामिल होने की तैयारी में हैं।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इस मामले पर फैसला लेने से पहले बागी सांसदों से कुछ जरूरी दस्तावेज मांगे थे। इनमें NCPI के चुनाव आयोग में पंजीकरण और पार्टी से जुड़े अन्य प्रमाण शामिल थे।
जानकारी के अनुसार, NCPI की ओर से मांगे गए सभी दस्तावेज लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय में जमा कर दिए गए हैं। इसके बाद स्पीकर कार्यालय ने इन दस्तावेजों की जांच प्रक्रिया पूरी कर ली है और अब अंतिम निर्णय का इंतजार है।
इससे पहले लोकसभा अध्यक्ष ने शिवसेना (यूबीटी) के छह बागी सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट वाली शिवसेना में विलय को मंजूरी दी थी। हालांकि, टीएमसी के बागी सांसदों के मामले में फैसला कुछ समय के लिए टाल दिया गया था।
टीएमसी के बागी सांसदों को लोकसभा में अलग बैठने के लिए सीटें भी आवंटित की गई हैं। यह कदम इस बात का संकेत माना जा रहा है कि उनके मामले पर लोकसभा में अलग से विचार किया जा रहा है।
रविवार को टीएमसी के वरिष्ठ नेता काकोली घोष दस्तीदार और सुदीप बंद्योपाध्याय ने NCPI के प्रतिनिधियों के रूप में सर्वदलीय बैठक में हिस्सा लिया था। उनके शामिल होने को लेकर विपक्षी दलों ने आपत्ति जताई थी।
अब राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला टीएमसी के 20 बागी सांसदों को NCPI के साथ विलय की मंजूरी देंगे या नहीं। उनके फैसले का असर संसद में दलों की स्थिति और राजनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है।
मानसून सत्र के पहले दिन आने वाले इस फैसले को विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों ही बेहद अहम मान रहे हैं। अगर विलय को मंजूरी मिलती है, तो लोकसभा में टीएमसी की संख्या और एनडीए के राजनीतिक समीकरणों में बदलाव देखने को मिल सकता है।

