JPSC मेन्स परीक्षा 2025 स्थगित: परीक्षा अनियमितताओं पर CID की बड़ी कार्रवाई, 8 गिरफ्तार; अध्यक्ष ने दिया इस्तीफा

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झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर राज्य में बड़ा प्रशासनिक और जांच अभियान शुरू हो गया है। परीक्षा संचालन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठने के बाद आयोग ने 14वीं संयुक्त असैनिक सेवा मुख्य (मेन) परीक्षा-2025 को फिलहाल स्थगित करने का निर्णय लिया है। यह परीक्षा 25, 26 और 27 जुलाई को रांची के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर आयोजित होनी थी, लेकिन जांच के दायरे में आई गड़बड़ियों और राज्य सरकार के निर्देशों को देखते हुए आयोग ने इसे अगले आदेश तक टाल दिया। आयोग ने स्पष्ट किया है कि नई परीक्षा तिथि और आगे की प्रक्रिया की जानकारी आधिकारिक रूप से बाद में जारी की जाएगी।

इस पूरे मामले में CID और रांची पुलिस की संयुक्त टीम ने व्यापक स्तर पर कार्रवाई करते हुए JPSC कार्यालय सहित कुल आठ स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। जांच के दौरान परीक्षा आयोजन से जुड़े दस्तावेज, कंप्यूटर सिस्टम, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्यों को कब्जे में लिया गया। अधिकारियों ने परीक्षा संचालन से जुड़े कई तकनीकी पहलुओं की भी जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसियों का उद्देश्य यह पता लगाना है कि परीक्षा प्रक्रिया के दौरान कहीं किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन या तकनीकी छेड़छाड़ तो नहीं हुई।

छापेमारी के दौरान परीक्षा आयोजित करने वाली निजी एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) के कार्यालयों की भी तलाशी ली गई। जांच एजेंसियों ने वहां मौजूद डिजिटल उपकरण, सर्वर, दस्तावेज और अन्य रिकॉर्ड जब्त कर उनकी फॉरेंसिक जांच शुरू कर दी है। कार्रवाई के बाद एजेंसी के कार्यालय को सील कर दिया गया। अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल डेटा की विस्तृत जांच से परीक्षा संचालन से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं, जिनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।

जांच के दौरान JPSC की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता सहित कुल आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार किए गए लोगों में परीक्षा प्रबंधन, डेटा एंट्री, प्रोग्रामिंग और तकनीकी संचालन से जुड़े कर्मचारी भी शामिल हैं। जांच एजेंसियां इन सभी से अलग-अलग पूछताछ कर रही हैं ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि परीक्षा प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता, मिलीभगत या तकनीकी हस्तक्षेप हुआ था या नहीं। अधिकारियों का कहना है कि आवश्यकता पड़ने पर आगे और लोगों से भी पूछताछ की जा सकती है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए झारखंड लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष एल. ख्यांगते ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। बाद में राज्यपाल ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया। अध्यक्ष के इस्तीफे को इस पूरे घटनाक्रम का महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। हालांकि जांच एजेंसियां यह स्पष्ट कर चुकी हैं कि कार्रवाई पूरी तरह जांच के आधार पर आगे बढ़ाई जाएगी और किसी भी स्तर पर यदि जिम्मेदारी तय होती है तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

CID की टीम ने सबसे पहले उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता से लंबी पूछताछ की और उसके बाद उन्हें उनके आवास पर ले जाकर तलाशी अभियान चलाया। वहां से आवश्यक दस्तावेज और अन्य सामग्री की जांच करने के बाद उन्हें दोबारा JPSC कार्यालय लाया गया, जहां कई घंटों तक रिकॉर्ड का मिलान किया गया। प्रारंभिक जांच पूरी होने के बाद उन्हें हिरासत में लिया गया। इस दौरान पूरे आयोग कार्यालय की सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी और जांच पूरी होने तक किसी भी कर्मचारी को परिसर से बाहर जाने की अनुमति नहीं दी गई।

जांच एजेंसियों ने इस मामले में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को अपनी जांच का आधार बनाया है। इनमें परीक्षा के बाद डिजिटल रिकॉर्ड या ओएमआर शीट में किसी प्रकार की छेड़छाड़, सर्वर डेटा में बदलाव, परीक्षा परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया, डेटा सुरक्षा और परीक्षा संचालन प्रणाली की पारदर्शिता जैसे विषय शामिल हैं। इसके अलावा आर्थिक लेन-देन की भी जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि यदि किसी प्रकार की अवैध वसूली हुई है तो वह राशि किन खातों तक पहुंची और उसमें किन लोगों की भूमिका रही।

इसके साथ ही यह भी जांच का विषय बनाया गया है कि परीक्षा संचालन का जिम्मा जिस निजी एजेंसी को दिया गया, उसका चयन किन मानकों के आधार पर किया गया। एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि संबंधित कंपनी के पूर्व रिकॉर्ड, विवादों और अन्य राज्यों में उसकी स्थिति की पूरी जांच की गई थी या नहीं। यदि चयन प्रक्रिया में किसी प्रकार की लापरवाही या नियमों की अनदेखी सामने आती है तो उसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में रहेगी।

इस पूरे विवाद की शुरुआत जून और जुलाई 2026 में जारी विभिन्न भर्ती परीक्षाओं के परिणामों के बाद हुई थी। पहले सहायक लोक अभियोजक भर्ती परीक्षा और उसके बाद 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के परिणामों को लेकर कई सवाल उठे। आयोग के कुछ सदस्यों द्वारा परिणामों पर हस्ताक्षर नहीं किए जाने और कटऑफ अंक सार्वजनिक नहीं करने जैसी घटनाओं ने अभ्यर्थियों के बीच संदेह को और बढ़ा दिया। इसके बाद परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे, जिसके चलते सरकार ने पूरे मामले की जांच के निर्देश दिए।

फिलहाल पुलिस, CID और डिजिटल फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीम जब्त किए गए दस्तावेजों, कंप्यूटर सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की गहन जांच कर रही है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में किसी भी स्तर पर परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी, तकनीकी छेड़छाड़ या नियमों के उल्लंघन के प्रमाण मिलते हैं तो संबंधित सभी व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं, अभ्यर्थियों को आश्वस्त किया गया है कि जांच पूरी होने के बाद पारदर्शिता बनाए रखते हुए मेन्स परीक्षा की नई तिथि और आगे की प्रक्रिया की आधिकारिक घोषणा की जाएगी।