दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने NEET UG 2026 पेपर लीक मामले में गिरफ्तार दो प्रमुख आरोपियों पी.वी. कुलकर्णी और शिवराज मोटेगांवकर की न्यायिक हिरासत 11 जुलाई तक बढ़ाने का आदेश दिया है। इस फैसले के साथ ही मामले की जांच आगे बढ़ाने के लिए CBI को अतिरिक्त समय मिल गया है।
CBI की जांच के अनुसार, पी.वी. कुलकर्णी इस पूरे नेटवर्क के मुख्य आरोपियों में शामिल हैं। एजेंसी का आरोप है कि उन्होंने परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े अपने पुराने अनुभव और जानकारी का गलत लाभ उठाकर प्रश्नपत्र लीक कराने की साजिश रची।
जांच एजेंसी का कहना है कि कुलकर्णी पहले NEET परीक्षा के प्रश्नपत्र तैयार करने वाले विशेषज्ञों के पैनल से जुड़े रहे थे। इसी वजह से उन्हें परीक्षा प्रणाली और उसकी गोपनीय प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी थी, जिसका कथित रूप से दुरुपयोग किया गया।
CBI के अनुसार, लीक हुए प्रश्नपत्र को कुछ विशेष कोचिंग संस्थानों तक पहुंचाने की योजना पहले से बनाई गई थी। जांच में यह भी सामने आया है कि परीक्षा से पहले ही चुनिंदा लोगों तक प्रश्नपत्र और उसके उत्तर पहुंचाए गए थे।
मामले के दूसरे आरोपी शिवराज मोटेगांवकर, जो लातूर स्थित एक कोचिंग संस्थान का संचालन करते हैं, पर आरोप है कि उन्हें परीक्षा से लगभग दस दिन पहले ही प्रश्नपत्र और उत्तर उपलब्ध करा दिए गए थे। एजेंसी इस बात की पुष्टि करने में जुटी है कि यह सामग्री किन माध्यमों से उनके पास पहुंची।
CBI अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाल रही है। जांच का दायरा केवल गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन सभी व्यक्तियों की जांच की जा रही है जिनका इस कथित साजिश से किसी भी रूप में संबंध हो सकता है।
एजेंसी ने NTA की परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े कुछ लोगों की भूमिका को भी जांच के दायरे में रखा है। जांचकर्ता यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि कहीं अंदरूनी स्तर पर गोपनीय जानकारी साझा तो नहीं की गई थी और यदि ऐसा हुआ तो इसमें कौन-कौन शामिल था।
इस मामले में मनीषा मंडारे सहित अन्य संदिग्ध व्यक्तियों के संबंधों और उनकी भूमिका की भी पड़ताल जारी है। जांच के दौरान दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है ताकि पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने लाई जा सके।
CBI का कहना है कि जांच अभी जारी है और नए साक्ष्यों के आधार पर आगे और कार्रवाई की जा सकती है। एजेंसी का उद्देश्य इस पूरे पेपर लीक नेटवर्क का खुलासा करना और इसमें शामिल प्रत्येक व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करना है।