नई दिल्ली में आज रक्षा संसदीय समिति की अहम बैठक, आत्मनिर्भर सैन्य क्षमता और डीपीएसयू सुधारों पर रहेगा फोकस

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नई दिल्ली में आज रक्षा संसदीय समिति की अहम बैठक, आत्मनिर्भर सैन्य क्षमता और डीपीएसयू सुधारों पर रहेगा फोकस

नई दिल्ली स्थित संसद भवन परिसर में बुधवार को रक्षा संबंधी संसदीय स्थायी समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में देश के रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (डीपीएसयू) की कार्यप्रणाली, आत्मनिर्भरता की दिशा में हुई प्रगति, आधुनिकीकरण की योजनाओं और भविष्य की रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। बैठक का उद्देश्य रक्षा क्षेत्र को अधिक सक्षम, आधुनिक और स्वदेशी तकनीक पर आधारित बनाना है।

बैठक की अध्यक्षता भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ सांसद राधा मोहन सिंह करेंगे। समिति के समक्ष रक्षा मंत्रालय और विभिन्न रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों के वरिष्ठ अधिकारी विस्तृत प्रस्तुति देंगे। इसमें रक्षा उत्पादन बढ़ाने, नई तकनीकों को अपनाने और स्वदेशी रक्षा उपकरणों के निर्माण को गति देने से जुड़े विषय प्रमुख रहेंगे।

बैठक के दौरान रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में चल रहे सुधारों की समीक्षा की जाएगी। समिति यह भी आकलन करेगी कि इन संस्थानों ने आधुनिक तकनीक, उत्पादन क्षमता, अनुसंधान तथा नवाचार के क्षेत्र में अब तक कितनी प्रगति की है और भविष्य में किन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है।

सरकार का लक्ष्य रक्षा क्षेत्र में आयात पर निर्भरता कम करते हुए स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देना है। इसी दिशा में डीपीएसयू की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए कई योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। बैठक में इन प्रयासों की वर्तमान स्थिति और उनके परिणामों पर भी विस्तृत चर्चा होगी।

समिति रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों से यह जानकारी भी प्राप्त करेगी कि देश में आधुनिक हथियारों, सैन्य उपकरणों, संचार प्रणालियों और रक्षा तकनीकों के विकास में किस प्रकार की प्रगति हुई है। साथ ही रक्षा निर्माण क्षेत्र में निजी उद्योगों और सार्वजनिक उपक्रमों के बीच सहयोग को मजबूत बनाने पर भी विचार किया जा सकता है।

बैठक में रक्षा क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास (आर एंड डी) को बढ़ावा देने, नई तकनीकों के उपयोग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वदेशी रक्षा प्रणालियों तथा भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों के अनुरूप सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने जैसे विषयों पर भी चर्चा होने की संभावना है।

समिति यह भी समीक्षा करेगी कि विभिन्न रक्षा परियोजनाओं को समय पर पूरा करने, लागत नियंत्रण बनाए रखने और उत्पादन प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए जा रहे हैं। इसके अलावा रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता से जुड़े सरकारी अभियानों की प्रगति का भी मूल्यांकन किया जाएगा।

इससे पहले समिति ने भारतीय सेना की भूमिका और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विभिन्न विषयों पर वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों के विचार सुने थे। उस दौरान देश की सुरक्षा व्यवस्था, सैन्य तैयारियों और भविष्य की रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा की गई थी। उसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए अब रक्षा उत्पादन और सार्वजनिक उपक्रमों के आधुनिकीकरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन बढ़ने से न केवल देश की सामरिक क्षमता मजबूत होगी, बल्कि रोजगार, तकनीकी विकास और रक्षा निर्यात को भी नई गति मिलेगी। आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत रक्षा उद्योग को सशक्त बनाना सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।

बैठक से निकलने वाले सुझाव और सिफारिशें आने वाले समय में रक्षा क्षेत्र की नीतियों, उत्पादन क्षमता, तकनीकी उन्नयन और आत्मनिर्भर सैन्य ढांचे को और अधिक मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। इसी कारण इस बैठक को रक्षा क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।