रूफटॉप सोलर में गुजरात नंबर-1, यूपी तीसरे स्थान पर; 36 लाख से ज्यादा घरों तक पहुंची सूर्य घर योजना

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देश में बिजली की बढ़ती लागत के बीच रूफटॉप सोलर सिस्टम लोगों के लिए किफायती विकल्प बनता जा रहा है। केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना को भी लगातार अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। योजना के तहत लाखों परिवार अपनी छतों पर सोलर पैनल लगाकर बिजली खर्च कम करने के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा को अपनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। सरकार की ओर से दी जा रही सब्सिडी ने भी इस अभियान को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

ताजा आंकड़ों के अनुसार, प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत देशभर में अब तक 36.47 लाख से अधिक घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित किए जा चुके हैं। इसके साथ ही 44.32 लाख से अधिक परिवार इस योजना से किसी न किसी रूप में लाभान्वित हो रहे हैं। योजना का उद्देश्य आम नागरिकों को सस्ती बिजली उपलब्ध कराना और देश में अक्षय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देना है।

सरकार ने इस योजना के तहत लाभार्थियों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए अब तक 25,995.21 करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी जारी की है। इस वित्तीय सहायता के कारण मध्यम और सामान्य आय वर्ग के परिवारों के लिए भी सोलर सिस्टम लगाना पहले की तुलना में अधिक आसान हो गया है। इससे बिजली के पारंपरिक स्रोतों पर निर्भरता कम करने की दिशा में भी सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।

देश में रूफटॉप सोलर क्षमता लगातार बढ़ रही है और अब यह 13,462.2 मेगावाट के स्तर तक पहुंच चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह क्षमता और तेजी से बढ़ सकती है, क्योंकि केंद्र और राज्य सरकारें अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही हैं।

राज्यों की बात करें तो गुजरात इस क्षेत्र में सबसे आगे बना हुआ है। राज्य में रूफटॉप सोलर की कुल स्थापित क्षमता 2,748.44 मेगावाट दर्ज की गई है। गुजरात में अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा, राजकोट और जूनागढ़ जैसे जिले इस अभियान की सफलता में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। इन शहरों में बड़ी संख्या में आवासीय और व्यावसायिक भवनों पर सोलर सिस्टम लगाए गए हैं।

दूसरे स्थान पर महाराष्ट्र है, जहां रूफटॉप सोलर की क्षमता 2,419.03 मेगावाट तक पहुंच गई है। राज्य के पुणे, नागपुर, ठाणे, नासिक और जलगांव जैसे जिलों में लोगों ने बड़े पैमाने पर इस योजना को अपनाया है। सरकार की प्रोत्साहन नीतियों और बढ़ती जागरूकता ने यहां सोलर ऊर्जा के विस्तार को गति दी है।

उत्तर प्रदेश इस सूची में तीसरे स्थान पर है। राज्य में कुल 2,198.26 मेगावाट रूफटॉप सोलर क्षमता दर्ज की गई है। लखनऊ, वाराणसी, कानपुर, बरेली और आगरा ऐसे जिले हैं जहां सबसे अधिक संख्या में सोलर सिस्टम लगाए गए हैं। प्रदेश में शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ कई अन्य जिलों में भी योजना के प्रति लोगों की रुचि लगातार बढ़ रही है।

रैंकिंग में चौथे स्थान पर केरल और पांचवें स्थान पर राजस्थान शामिल हैं। केरल के एर्नाकुलम, त्रिशूर, तिरुवनंतपुरम, कोल्लम और अलाप्पुझा जैसे जिले सोलर ऊर्जा के उपयोग में आगे हैं। वहीं राजस्थान में भी घरेलू और व्यावसायिक स्तर पर रूफटॉप सोलर परियोजनाओं का विस्तार लगातार हो रहा है।

प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का मुख्य उद्देश्य हर घर तक स्वच्छ और किफायती ऊर्जा पहुंचाना है। इसके माध्यम से उपभोक्ताओं को बिजली बिल में राहत मिलने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है। देश में सौर ऊर्जा की बढ़ती क्षमता यह संकेत देती है कि आने वाले समय में अक्षय ऊर्जा भारत की ऊर्जा व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बनने वाली है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी गति से रूफटॉप सोलर का विस्तार जारी रहा तो आने वाले वर्षों में देश की ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा सौर ऊर्जा से पूरा किया जा सकेगा। इससे न केवल बिजली उत्पादन में स्वदेशी संसाधनों का उपयोग बढ़ेगा, बल्कि कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने और स्वच्छ ऊर्जा आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी मदद मिलेगी।

सरकार की योजनाओं, सब्सिडी और नागरिकों की बढ़ती भागीदारी के कारण रूफटॉप सोलर अभियान लगातार नई ऊंचाइयों तक पहुंच रहा है। गुजरात, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों का प्रदर्शन यह दर्शाता है कि देश में सौर ऊर्जा को लेकर जागरूकता तेजी से बढ़ रही है और आने वाले समय में अधिक से अधिक परिवार इस तकनीक को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।