केंद्र सरकार ने 12% से अधिक एथिल अल्कोहल युक्त ओरल दवाओं की बिक्री को लेकर नए नियम लागू किए हैं। अब ऐसी दवाएं बिना डॉक्टर के वैध प्रिस्क्रिप्शन के मेडिकल स्टोर से नहीं खरीदी या बेची जा सकेंगी। सरकार ने दवाओं के गलत इस्तेमाल और इनके जरिए होने वाले नशे पर रोक लगाने के उद्देश्य से ड्रग्स रूल्स, 1945 में संशोधन किया है। नए प्रावधानों के तहत 12% से ज्यादा एथिल अल्कोहल वाली तथा 30 मिलीलीटर से बड़ी बोतलों में बिकने वाली पीने योग्य दवाओं को अब ‘शेड्यूल H1’ श्रेणी में शामिल किया गया है।
इस बदलाव के बाद मेडिकल स्टोर संचालकों के लिए भी नियम पहले की तुलना में अधिक सख्त हो गए हैं। अब फार्मेसी संचालकों को ऐसी दवाएं केवल रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर द्वारा जारी प्रिस्क्रिप्शन पर ही उपलब्ध करानी होंगी। इसके साथ ही प्रत्येक बिक्री का पूरा रिकॉर्ड अलग रजिस्टर में दर्ज करना अनिवार्य होगा, जिसमें मरीज का नाम, डॉक्टर का नाम, दवा का विवरण और बेची गई मात्रा जैसी जानकारी शामिल रहेगी। यह रिकॉर्ड कम से कम तीन वर्षों तक सुरक्षित रखना होगा ताकि आवश्यकता पड़ने पर ड्रग रेगुलेटरी अधिकारी इसकी जांच कर सकें।
सरकार का कहना है कि बाजार में उपलब्ध कुछ कफ सिरप, टॉनिक और अन्य लिक्विड दवाओं में अल्कोहल की मात्रा अपेक्षाकृत अधिक होती है। लंबे समय से ऐसी शिकायतें सामने आ रही थीं कि कुछ लोग इन दवाओं का चिकित्सकीय उपयोग के बजाय नशे के उद्देश्य से सेवन कर रहे हैं। इसी तरह के दुरुपयोग को रोकने, दवाओं की बिक्री पर प्रभावी निगरानी रखने और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह फैसला लिया गया है। इस संबंध में विशेषज्ञ समितियों द्वारा समीक्षा किए जाने के बाद नियमों में संशोधन लागू किया गया है।
हालांकि, इन दवाओं पर किसी प्रकार का प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। यदि किसी मरीज को डॉक्टर द्वारा यह दवा लिखी जाती है, तो वह पहले की तरह मेडिकल स्टोर से उपलब्ध रहेगी। अंतर केवल इतना होगा कि अब दवा खरीदते समय डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन दिखाना अनिवार्य होगा। इसका उद्देश्य मरीजों को आवश्यक उपचार से वंचित करना नहीं, बल्कि दवाओं का जिम्मेदारी के साथ उपयोग सुनिश्चित करना है।
दवाओं में एथिल अल्कोहल का उपयोग कई मामलों में सॉल्वेंट और प्रिजर्वेटिव के रूप में किया जाता है, जिससे दवा की गुणवत्ता और स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलती है। निर्धारित मात्रा में इसका उपयोग सामान्य रूप से सुरक्षित माना जाता है, लेकिन बिना चिकित्सकीय सलाह के या जरूरत से अधिक सेवन करने पर स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं। इसी कारण सरकार अब ऐसी दवाओं की बिक्री और वितरण पर अधिक निगरानी रखना चाहती है।
‘शेड्यूल H1’ श्रेणी पहले से ही उन दवाओं के लिए लागू है जिनके दुरुपयोग की संभावना अधिक रहती है और जिनकी बिक्री पर विशेष निगरानी आवश्यक होती है। अब 12% से अधिक अल्कोहल युक्त निर्धारित श्रेणी की ओरल दवाओं को भी इसमें शामिल किए जाने से उनकी ट्रैकिंग पहले से अधिक प्रभावी होगी। इससे यह पता लगाना आसान होगा कि दवा किस मेडिकल स्टोर से, किस डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन पर और किस मरीज को बेची गई।
सरकार का मानना है कि नए नियम लागू होने से दवाओं के दुरुपयोग पर अंकुश लगाने, मेडिकल स्टोर्स में पारदर्शिता बढ़ाने, ड्रग रेगुलेटरी सिस्टम को मजबूत करने और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। साथ ही जरूरतमंद मरीजों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं पहले की तरह उपलब्ध होती रहेंगी, जबकि अनियंत्रित और बिना प्रिस्क्रिप्शन वाली बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा।

