जम्मू-कश्मीर में आयोजित होने वाली श्री अमरनाथ यात्रा-2026 को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक नई पहचान देने के लिए इसे देश की पहली जीरो लैंडफिल तीर्थयात्रा बनाने की पहल की गई है। इस अभियान का उद्देश्य यात्रा के दौरान उत्पन्न होने वाले कचरे को लैंडफिल में भेजने के बजाय वैज्ञानिक तरीकों से उसका पुनः उपयोग और प्रसंस्करण करना है, ताकि पर्यावरण पर पड़ने वाला प्रभाव न्यूनतम रहे।
यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालुओं के आने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने ठोस और तरल दोनों प्रकार के कचरे के प्रभावी प्रबंधन की विस्तृत व्यवस्था की है। अनुमान है कि पूरी यात्रा अवधि में लगभग 700 मीट्रिक टन कचरा उत्पन्न होगा। इसके लिए बालटाल और पहलगाम दोनों प्रमुख मार्गों पर पर्याप्त संख्या में डस्टबिन लगाए गए हैं तथा विशेष सफाई दल चौबीसों घंटे तैनात किए गए हैं। ये टीमें नियमित रूप से कचरा एकत्र कर उसे वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से अलग-अलग श्रेणियों में प्रोसेस कर रही हैं।
इस पहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा जैविक कचरे का उपयोग भी है। यात्रा मार्ग पर खच्चरों और अन्य पशुओं से निकलने वाले गोबर को बायोगैस उत्पादन के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। इससे एक ओर जैविक अपशिष्ट का सही उपयोग होगा, वहीं स्वच्छ ऊर्जा के उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा। प्लास्टिक कचरे को कम करने के उद्देश्य से यात्रा मार्ग पर कई स्थानों पर वाटर एटीएम स्थापित किए गए हैं, जिससे श्रद्धालु बार-बार प्लास्टिक की बोतलें खरीदने के बजाय अपनी बोतलों में पानी भर सकें।
पूरे अभियान का संचालन स्वाहा रिसोर्स मैनेजमेंट और जम्मू-कश्मीर के ग्रामीण स्वच्छता विभाग के सहयोग से किया जा रहा है। आधुनिक मशीनों और वैज्ञानिक तकनीकों की मदद से कचरे का संग्रह, पृथक्करण, पुनर्चक्रण और सुरक्षित निस्तारण सुनिश्चित किया जा रहा है। सफाईकर्मी यात्रा के पहले दिन से ही लगातार अपनी सेवाएं दे रहे हैं, ताकि पूरे मार्ग पर स्वच्छता बनी रहे और किसी भी प्रकार का कचरा खुले में न फैले।
इस पर्यावरण-अनुकूल पहल का उद्देश्य केवल यात्रा मार्ग को साफ रखना नहीं, बल्कि तीर्थयात्राओं के लिए एक ऐसा मॉडल तैयार करना भी है जिसे भविष्य में देश के अन्य बड़े धार्मिक आयोजनों में अपनाया जा सके। यदि यह अभियान सफल रहता है, तो अमरनाथ यात्रा स्वच्छता, सतत विकास और प्रभावी कचरा प्रबंधन का एक राष्ट्रीय उदाहरण बन सकती है।

