जैसलमेर में मंगलवार सुबह चलती स्कूल बस में अचानक आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। हादसे के वक्त बस में 17 बच्चे सवार थे। इंजन से धुआं उठता देख ड्राइवर ने तुरंत बस रोक दी और सभी बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
हादसा सदर थाना इलाके में धऊवा गांव के पास सुबह करीब 6:30 बजे हुआ। बताया जा रहा है कि बस पिथला गांव से बच्चों को लेकर डाबला रोड स्थित एसएम पब्लिक स्कूल जा रही थी। इसी दौरान बस के इंजन वाले हिस्से से अचानक धुआं उठने लगा।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कुछ ही देर में धुआं तेज हो गया और बस में आग की लपटें दिखाई देने लगीं। ड्राइवर द्वारकाराम ने बिना देर किए बस को सड़क किनारे रोका और गेट खोलकर सभी बच्चों को बाहर निकाल दिया।
स्थानीय ग्रामीणों ने भी मौके पर पहुंचकर बच्चों को बस से दूर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने में मदद की। समय रहते सभी बच्चों को बाहर निकाल लेने से बड़ा हादसा टल गया। गनीमत रही कि आग की चपेट में आने से किसी भी बच्चे को चोट नहीं आई।
आग इतनी भीषण थी कि कुछ ही मिनटों में पूरी बस जलकर कबाड़ हो गई। बस में रखे बच्चों के स्कूल बैग, कॉपियां, किताबें और अन्य सामान भी आग में जल गया। घटना के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई।
सूचना मिलने के बाद फायर ब्रिगेड की तीन गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। दमकलकर्मियों ने पानी की बौछार कर काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। आग बुझने तक बस पूरी तरह जल चुकी थी।
प्रारंभिक जांच में बस की वायरिंग में शॉर्ट सर्किट को आग लगने की संभावित वजह माना जा रहा है। पुलिस के मुताबिक, सड़क पर बने गड्ढे में बस का आगे का पहिया जाने के बाद अचानक झटका लगा था, जिसके बाद इंजन वाले हिस्से से धुआं उठने लगा।

हादसे के बाद बस के दस्तावेजों की भी जांच की गई। जांच में सामने आया कि बस का फिटनेस सर्टिफिकेट 29 जुलाई 2026 को ही खत्म हो चुका था। यानी हादसे के समय बस का फिटनेस प्रमाणपत्र वैध नहीं था।
डीटीओ टीकूराम पूनड़ के मुताबिक, हादसे के कारणों के साथ बस के दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि बस की फिटनेस समाप्त हो चुकी थी और मामले में जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
स्कूल प्रिंसिपल प्रदीप कुमार यादव ने बताया कि बस रोजाना पिथला गांव से 17 बच्चों को लेकर स्कूल आती थी। वहीं, पुलिस ने सभी बच्चों को सुरक्षित उनके परिजनों के साथ घर भेज दिया है और हादसे के कारणों की जांच जारी है।

