VHP नेता का दावा- जंतर-मंतर आंदोलन में अपराधी शामिल थे, पंजाब में धर्मांतरण को लेकर भी जताई चिंता

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विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री मिलिंद परांडे ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए एक आंदोलन को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। पठानकोट में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने आंदोलन में शामिल लोगों और उसके स्वरूप को लेकर कई गंभीर दावे किए।

परांडे ने दावा किया कि जंतर-मंतर के आंदोलन में बड़ी संख्या में हिस्ट्रीशीटर और गंभीर अपराधों में आरोपी लोग शामिल थे। उन्होंने करीब 2,800 हिस्ट्रीशीटर, 60 हत्यारों और 100 से अधिक बलात्कार के आरोपियों के शामिल होने की बात कही।

उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों की मौजूदगी वाले किसी आंदोलन को केवल छात्रों या ‘जेन-जी’ का आंदोलन बताना उचित नहीं है। उनके मुताबिक आंदोलन की वास्तविक प्रकृति को समझने के लिए उसमें शामिल लोगों की पृष्ठभूमि पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।

पंजाब में धर्मांतरण के मुद्दे पर भी मिलिंद परांडे ने चिंता जताई। उन्होंने दावा किया कि विदेशी फंडिंग के जरिए गरीब सिखों और अन्य कमजोर वर्ग के लोगों का कथित तौर पर धर्म परिवर्तन कराने की कोशिश की जा रही है।

परांडे ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों को ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रभावित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विदेशी फंडिंग के जरिए होने वाले कथित धर्मांतरण पर रोक लगाने के लिए मौजूदा कानूनी प्रावधानों को प्रभावी तरीके से लागू किया जाना जरूरी है।

उन्होंने सीमावर्ती इलाकों में जनसंख्या के संतुलन को लेकर भी चिंता व्यक्त की। इस दौरान उन्होंने अवैध घुसपैठ, धर्मांतरण और ‘लव जिहाद’ जैसे मुद्दों का उल्लेख करते हुए सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों से सतर्क रहने की अपील की।

VHP नेता ने कहा कि इन मुद्दों को केवल राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि सामाजिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी इन पर विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों से किसी भी संदिग्ध गतिविधि को लेकर जागरूक रहने की बात कही।

मिलिंद परांडे ने युवाओं को लेकर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि देश का वास्तविक युवा केवल आंदोलनों में दिखाई देने वाला वर्ग नहीं है, बल्कि बड़ी संख्या में युवा धार्मिक यात्राओं और तीर्थस्थलों पर भी पहुंच रहा है।

उन्होंने वैष्णो देवी, बूढ़ा अमरनाथ, कांवड़ यात्रा, अयप्पा मंदिर और स्वर्ण मंदिर जैसे धार्मिक स्थलों का उल्लेख करते हुए कहा कि युवाओं की बड़ी संख्या धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय रूप से भाग ले रही है।

परांडे ने अंत में देश के लोगों से सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों को लेकर सजग रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश में ऐसी परिस्थितियां दोबारा पैदा नहीं होनी चाहिए, जिनसे समाज में विभाजन या बड़े स्तर पर विस्थापन की स्थिति बने।