दूषित पानी ने इंदौर में ली एक और जान, भागीरथपुरा में मौतों का आंकड़ा 25 पहुंचा; 51 वर्षीय हेमंत गायकवाड़ का इलाज के दौरान निधन, 38 मरीज अब भी भर्ती!

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जनतंत्र, मध्यप्रदेश, श्रुति घुरैया:

इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से जुड़ा संकट थमने का नाम नहीं ले रहा है। मंगलवार देर रात इलाज के दौरान 51 वर्षीय हेमंत गायकवाड़ की मौत हो गई। इसके साथ ही क्षेत्र में दूषित पानी से जुड़ी मौतों का आंकड़ा बढ़कर 25 हो गया है। लगातार सामने आ रहे मामलों से इलाके में डर और असमंजस का माहौल बना हुआ है।

हेमंत गायकवाड़, जिन्हें मोहल्ले में बाला के नाम से जाना जाता था, 22 दिसंबर को अचानक बीमार पड़े थे। परिजनों के मुताबिक, दूषित पानी पीने के बाद उन्हें उल्टी-दस्त की शिकायत शुरू हुई। हालत बिगड़ने पर 24 दिसंबर को उन्हें परदेशीपुरा स्थित वर्मा नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया। चार दिन इलाज के बाद 28 दिसंबर को उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया, लेकिन तबीयत पूरी तरह संभल नहीं पाई।

घर लौटने के बाद एक बार फिर उनकी हालत बिगड़ी। 7 जनवरी को परिजन उन्हें अरविंदो हॉस्पिटल लेकर पहुंचे, जहां 8 जनवरी से उनका इलाज चल रहा था। कई दिनों तक डॉक्टरों ने कोशिश की, लेकिन मंगलवार रात करीब तीन बजे हेमंत ने दम तोड़ दिया।

अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, हेमंत को पहले से सेल कार्सिनोमा नामक कैंसर और किडनी से जुड़ी बीमारी थी। हालांकि उन्हें अस्पताल में उल्टी-दस्त की गंभीर समस्या के चलते भर्ती किया गया था। इसके बाद उनकी तबीयत लगातार खराब होती चली गई।

हेमंत अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। वे ई-रिक्शा चलाकर परिवार का खर्च चलाते थे। उनके पीछे चार बेटियां हैं—21 वर्षीय रिया, 20 वर्षीय जिया, 16 वर्षीय खुशबू और 12 वर्षीय मनाली। पिता की मौत के बाद परिवार पर आर्थिक संकट गहरा गया है। घर में अब कोई स्थायी कमाई का जरिया नहीं बचा है।

बेटी जिया ने बताया कि पिता की तबीयत अचानक बिगड़ी थी। पहले इलाज के बाद लगा था कि हालत संभल रही है, लेकिन दोबारा परेशानी बढ़ गई। अस्पताल में जांच के दौरान कैंसर और किडनी की बीमारी की भी जानकारी मिली। जिया के मुताबिक, परिवार इस सदमे से अभी उबर भी नहीं पाया है।

परिवार ने यह भी बताया कि हेमंत अपनी स्थिति को लेकर राहुल गांधी से मिलना चाहते थे, लेकिन अस्पताल में भर्ती होने के कारण यह मुलाकात नहीं हो सकी। उन्होंने अपनी परेशानी नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे तक जरूर पहुंचाई थी।

भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी की शिकायतें कोई नई बात नहीं हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से गंदे पानी की समस्या बनी हुई थी, लेकिन समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। हालात बिगड़ते चले गए और अब लगातार मौतों की खबरें सामने आ रही हैं।

स्थिति अभी भी पूरी तरह नियंत्रण में नहीं है। फिलहाल 38 मरीज अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं। इनमें से 10 की हालत गंभीर बनी हुई है और वे आईसीयू में हैं। तीन मरीज वेंटिलेटर पर बताए जा रहे हैं। लगातार हो रही मौतों और गंभीर मामलों के चलते इलाके में दहशत का माहौल बना हुआ है।

भागीरथपुरा में दूषित पानी से जुड़ा यह संकट अब सिर्फ स्वास्थ्य का नहीं, बल्कि मानवीय और सामाजिक चिंता का विषय बन चुका है। लोग सवाल कर रहे हैं कि आखिर कब तक इस समस्या का स्थायी समाधान निकलेगा।