उज्जैन में शिप्रा नदी के तट पर स्थित संत शिरोमणि रविदास घाट रविवार को सामाजिक समरसता का जीवंत प्रतीक बन गया। संत शिरोमणि रविदास जी महाराज की 650वीं जन्म जयंती वर्ष के अवसर पर सामाजिक समरसता मंच द्वारा यहां एक भव्य, सांस्कृतिक और वैचारिक आयोजन किया गया, जिसने शहर के धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक परिवेश को एक साझा मंच पर जोड़ दिया।
यह आयोजन उज्जैन में अपनी तरह का विशिष्ट कार्यक्रम रहा, जहां संत समाज के साथ-साथ 100 से अधिक समाजों के प्रमुखों ने एक साथ सहभागिता कर सामाजिक एकता का संदेश दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत “समरसता गीत – संस्कृति एक चिरंतर” की भावपूर्ण प्रस्तुति से हुई। अंतर्राष्ट्रीय कथक नृत्यांगना और प्रिंसेस ऑफ कथक के रूप में पहचानी जाने वाली डॉ. खुशबू पांचाल की शिष्याओं ने मनोहारी कथक नृत्य के माध्यम से समरसता और सांस्कृतिक एकता को मंच पर जीवंत कर दिया।
इस प्रस्तुति में प्रियंका शुक्ला, पूर्वा भालेराव, देवयानी गौड़, ख्याति पाटीदार, याशी गर्ग, सृष्टि निखार, परिधि तोमर, लक्षिता मरमट, श्रुति स्वर्णकार, अनाया स्वर्णकार, अर्चना मधुराज और कृतिका जायसवाल ने सहभागिता की।
दीप प्रज्वलन के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
सांस्कृतिक प्रस्तुति के उपरांत अतिथियों ने संत शिरोमणि रविदास जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर दीप प्रज्वलन किया, जिसके साथ कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ हुआ।
संत समाज की गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम में विभिन्न अखाड़ों, आश्रमों और मंदिरों से पधारे संत-महात्माओं की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की। प्रमुख रूप से महामंडलेश्वर शान्ति स्वरूपानन्द महाराज (चारधाम), महंत महावीर नाथ (ऋणमुक्तेश्वर), महंत रामानन्द महाराज, महंत \भवानीदास महाराज, महंत गजानन्द सरस्वती महाराज, महंत सेवा नन्दगिरी, स्वामी अमर गिरि महाराज, अंतर्राष्ट्रीय संत स्वामी परमानन्द महाराज, महंत चरणदास महाराज और महंत राधेश्यामदास महाराज विशेष रूप से उपस्थित रहे।
संत रविदास के जीवन दर्शन पर विचार
महामंडलेश्वर श्री शान्ति स्वरूपानन्द जी महाराज ने अपने उद्बोधन में संत रविदास जी के समरसता-पूर्ण जीवन दर्शन पर प्रकाश डाला। वहीं महंत श्री महावीर नाथ जी महाराज ने संत रविदास के जीवन से प्रेरणा लेते हुए सामाजिक समरसता और समानता के महत्व पर विचार साझा किए।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्रीय संपर्क प्रमुख श्री प्रवीण जी गुप्त रहे।
100 से अधिक समाजों का प्रतिनिधित्व
मंच पर उपस्थित सभी संतों और वक्ताओं का सम्मान कार्यक्रम संयोजक श्री धर्मेंद्र सिंह परिहार एवं सह-संयोजक श्री ओमप्रकाश मोहने द्वारा, समाज प्रमुखों के सहयोग से किया गया। इस अवसर पर उज्जैन महानगर के 100 से अधिक समाजों का प्रतिनिधित्व देखने को मिला, जिसने कार्यक्रम को व्यापक सामाजिक स्वरूप प्रदान किया।
सामूहिक आरती और 2121 दीपकों से सजी शिप्रा तट की छटा
कार्यक्रम के समापन अवसर पर सभी पूजनीय संतों और समाज प्रमुखों ने सामूहिक रूप से संत शिरोमणि रविदास जी की आरती की। इसके साथ ही मंदिर एवं घाट परिसर को 2121 दीपकों से सजाया गया, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा और प्रकाश से आलोकित हो उठा।
प्रमुख अतिथियों की उपस्थिति
पूरे कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, मालवा प्रान्त के सहकार्यवाह रघुवीर सिंह सिसोदिया, मालवा प्रान्त सामाजिक समरसता संयोजक मुकेश दिसावल, प्रांत सह संयोजक धर्मेंद्र मौर्य और शेखर दिसावल की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम के समापन पर सामाजिक समरसता मंच की ओर से सह-संयोजक जयश्री गिरी ने आभार व्यक्त किया।
