प्रेस कॉन्फ्रेंस में उलझे मंत्री सिलावट, अपनी ही पार्टी के विधायक को लेकर दिए विरोधाभासी बयान; बाद में बदला रुख

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मध्य प्रदेश की राजनीति में गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ऐसा घटनाक्रम सामने आया, जिसने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी। जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट मीडिया के सवालों का जवाब देते समय असहज स्थिति में नजर आए, जब वे अपनी ही पार्टी के आलोट विधायक और पूर्व सांसद चिंतामणि मालवीय को पहचान नहीं पाए। स्थिति तब और ज्यादा चर्चा में आ गई, जब उन्होंने मालवीय पर लगे आरोपों को पहले कांग्रेस का आंतरिक मामला बता दिया और बाद में अलग-अलग बयान देते दिखाई दिए।

दरअसल, हाल ही में मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष रीना बौरासी सेतिया ने भाजपा विधायक चिंतामणि मालवीय पर एक महिला के यौन शोषण के आरोप लगाए हैं। आरोपों के बाद मालवीय की ओर से 10 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेजा गया है। इसी विषय को लेकर मीडिया ने मंत्री तुलसीराम सिलावट से सवाल किया था।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब पत्रकारों ने चिंतामणि मालवीय का नाम लेते हुए उनसे प्रतिक्रिया मांगी, तो मंत्री सिलावट ने शुरुआत में कहा कि यह कांग्रेस का अंदरूनी मामला है और उनसे इस बारे में सवाल क्यों पूछा जा रहा है। मंत्री के इस जवाब के बाद मंच पर मौजूद भाजपा नेताओं ने तुरंत उन्हें टोका और याद दिलाया कि चिंतामणि मालवीय भाजपा के विधायक हैं और आलोट सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं।

इसके बाद भी मंत्री सिलावट स्थिति को स्पष्ट तरीके से संभालते नजर नहीं आए। उन्होंने पहले कहा कि यदि आरोप लगाए गए हैं तो संभवतः कुछ आधार होगा और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। मंत्री ने यह भी कहा कि यदि जांच में कुछ गलत पाया गया तो कार्रवाई की जाएगी।

हालांकि, कुछ ही देर बाद उन्होंने अपने बयान का रुख बदल लिया। जब मीडिया ने दोबारा सवाल पूछा और बताया कि रीना बौरासी द्वारा लगाए गए आरोपों के जवाब में मालवीय ने मानहानि का दावा पेश किया है, तब मंत्री सिलावट ने आरोपों को बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि चिंतामणि मालवीय का पक्ष अलग है और जिस तरह सवाल पूछा जा रहा है, वह सही तरीके से प्रस्तुत नहीं किया जा रहा। मंत्री ने यह भी कहा कि लगाए गए आरोप पूरी तरह गलत हैं।

पूरे घटनाक्रम के दौरान मंत्री सिलावट के जवाबों में बार-बार बदलाव देखने को मिला। पहले उन्होंने आरोपों को गंभीर मानते हुए जांच की बात कही, फिर बाद में उन्हें निराधार बताया। यही कारण रहा कि प्रेस कॉन्फ्रेंस का यह हिस्सा तेजी से राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया।

मीडिया और राजनीतिक हलकों में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर हुई कि मंत्री शुरुआत में चिंतामणि मालवीय को पहचान ही नहीं पाए। जब पत्रकारों ने कहा कि मालवीय भाजपा विधायक हैं, तब मंत्री ने आश्चर्य जताते हुए पूछा कि “चिंतामणि अपने?” इसके बाद मंच पर मौजूद भाजपा जिलाध्यक्ष श्रवण चावड़ा ने उन्हें याद दिलाया कि मालवीय आलोट से पार्टी के विधायक हैं।

इस घटनाक्रम के बाद कांग्रेस ने भी मंत्री के बयान को लेकर भाजपा पर निशाना साधा। कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे ने सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हुए लिखा कि सत्ता और पद की राजनीति भले किसी को भाजपा में ले जाए, लेकिन कांग्रेस की विचारधारा अब भी उनके भीतर दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि मंत्री के बयान में कांग्रेस के पुराने आदर्शों की झलक दिखाई दी।

उधर, भाजपा की ओर से इस मामले पर आधिकारिक तौर पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन प्रेस कॉन्फ्रेंस का वीडियो और मंत्री के बदलते बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस पूरे घटनाक्रम ने विपक्ष को सरकार पर सवाल उठाने का नया मौका दे दिया है।

वहीं, चिंतामणि मालवीय पर लगे आरोपों और उनके द्वारा भेजे गए मानहानि नोटिस को लेकर राजनीतिक बयानबाजी का दौर लगातार जारी है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि मामले में आगे क्या कानूनी और राजनीतिक घटनाक्रम सामने आते हैं।