खंडवा जिले की तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग और ममलेश्वर मंदिर को जोड़ने वाले प्रमुख झूला पुल पर तकनीकी खराबी सामने आने के बाद प्रशासन ने एहतियातन आवाजाही पूरी तरह बंद कर दी है। पुल की लोडिंग वायर की एक कड़ी टूटने से सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ गई हैं।
मंगलवार देर रात खराबी की जानकारी मिलने के बाद बुधवार सुबह प्रशासन ने पुल के दोनों सिरों पर बैरिकेडिंग कर ताला लगा दिया। श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने की सलाह दी गई है, ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके।

स्थानीय लोगों का कहना है कि लोडिंग वायर की एक कड़ी टूटने के कारण पुल की अन्य सपोर्ट कड़ियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। इसके साथ ही पुल का एक हिस्सा हल्का झुका हुआ भी दिखाई दे रहा है, जिससे लोगों में डर और चिंता का माहौल है।
प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल मरम्मत कार्य शुरू करा दिया है। नायब तहसीलदार उदय मंडलोई के अनुसार विशेषज्ञों की टीम पुल की तकनीकी जांच कर रही है और पूरी तरह सुरक्षित घोषित किए जाने के बाद ही इसे दोबारा आम लोगों के लिए खोला जाएगा। अनुमान है कि दो से तीन दिन में आवागमन बहाल किया जा सकता है।

यह पहली बार नहीं है जब इस झूला पुल में तकनीकी समस्या सामने आई हो। इससे पहले वर्ष 2023 में महाशिवरात्रि से पहले भी पुल में खराबी आने के कारण लंबे समय तक आवाजाही प्रभावित रही थी। लगातार दूसरी बार आई समस्या ने पुल के रखरखाव और नियमित सुरक्षा जांच पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु इसी पुल से होकर भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए पहुंची थीं। घटना के समय कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ, जिससे प्रशासन और श्रद्धालुओं ने राहत की सांस ली, लेकिन अब सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
सूत्रों के अनुसार झूला पुल का रखरखाव और हैंडओवर लंबे समय से विभिन्न एजेंसियों के बीच विचाराधीन है। जिम्मेदारी स्पष्ट नहीं होने के कारण समय पर व्यापक मरम्मत और तकनीकी निरीक्षण प्रभावित होने की बात भी सामने आती रही है, जिससे स्थानीय लोग चिंता जता रहे हैं।

ओंकारेश्वर में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं और आने वाले समय में सिंहस्थ की तैयारियों के चलते यह संख्या और बढ़ने की संभावना है। ऐसे में पुल जैसी महत्वपूर्ण संरचना की नियमित तकनीकी जांच, भार क्षमता परीक्षण और मजबूत सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी बन गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते स्थायी समाधान और नियमित निगरानी की प्रभावी व्यवस्था नहीं की गई तो भविष्य में बड़ा हादसा हो सकता है। फिलहाल मरम्मत कार्य जारी है और प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा मानकों की पूरी जांच के बाद ही श्रद्धालुओं के लिए पुल पर आवाजाही दोबारा शुरू की जाएगी।