सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उस याचिका पर सुनवाई की, जिसमें मांग की गई है कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान वोटर लिस्ट से जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, उन्हें सरकारी कल्याणकारी योजनाओं और सुविधाओं से वंचित न किया जाए।
याचिका में कहा गया है कि मतदाता सूची में नाम नहीं होने के आधार पर किसी व्यक्ति को सरकारी योजनाओं का लाभ रोकना उचित नहीं होना चाहिए, क्योंकि सरकारी सुविधाएं नागरिकों के कल्याण के लिए होती हैं।
इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने की। कोर्ट ने मामले में चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले में दोनों पक्षों के जवाब के बाद आगे की सुनवाई करेगा। मामले की अगली सुनवाई 25 जुलाई से पहले होने की संभावना है।

