PM मोदी SCO शिखर सम्मेलन के लिए बिश्केक पहुंचे: महात्मा गांधी को दी श्रद्धांजलि, पुतिन-जिनपिंग से मुलाकात पर नजर

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उज्बेकिस्तान के दौरे के बाद किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक पहुंचे हैं। यहां वे शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO के शिखर सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। सम्मेलन में कई सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष और शीर्ष नेता शामिल हो रहे हैं।

बिश्केक पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद उन्होंने वहां मौजूद भारतीय समुदाय के लोगों से मुलाकात की और उनसे बातचीत की। इस दौरान भारतीय समुदाय के लोगों में प्रधानमंत्री से मिलने को लेकर उत्साह दिखाई दिया।

SCO का यह सम्मेलन संगठन के 25 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित किया जा रहा है। इस बार सम्मेलन की थीम सतत शांति, विकास और समृद्धि के लिए मिलकर आगे बढ़ने पर केंद्रित है। सम्मेलन में सदस्य देश क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करेंगे।

इस सम्मेलन में भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, ईरान समेत SCO के 10 सदस्य देशों के नेता हिस्सा ले रहे हैं। भारत की ओर से प्रधानमंत्री मोदी महत्वपूर्ण मुद्दों पर देश का पक्ष रखेंगे और सदस्य देशों के साथ सहयोग बढ़ाने पर बातचीत करेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा के दौरान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात पर भी नजर रहेगी। दोनों नेताओं के साथ संभावित बातचीत को भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भारत के लिए मध्य एशिया के देशों के साथ संबंध मजबूत करना भी इस सम्मेलन का एक अहम पहलू है। मध्य एशिया तेल, गैस, यूरेनियम और कई महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों के लिहाज से महत्वपूर्ण क्षेत्र है। भारत इस क्षेत्र के साथ अपने आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को लगातार मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।

ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से भी मध्य एशिया भारत के लिए महत्वपूर्ण है। भारत अपनी बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए इस क्षेत्र के देशों के साथ सहयोग और संपर्क बढ़ाना चाहता है। ऐसे में SCO के मंच पर ऊर्जा से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की संभावना है।

भारत मध्य एशिया के साथ व्यापार और परिवहन संपर्क बढ़ाने के लिए नए मार्ग विकसित करने पर भी जोर देता रहा है। बेहतर कनेक्टिविटी से दोनों क्षेत्रों के बीच व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है। SCO का मंच इन मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने का अवसर देता है।

सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दे भी सम्मेलन में महत्वपूर्ण रहेंगे। अफगानिस्तान की स्थिति, क्षेत्रीय सुरक्षा और आतंकवाद से निपटने जैसे विषयों पर सदस्य देशों के बीच चर्चा हो सकती है। भारत लंबे समय से आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग बढ़ाने की बात करता रहा है।

SCO की स्थापना 15 जून 2001 को चीन के शंघाई शहर में हुई थी। शुरुआत में इसमें चीन, रूस, कजाखस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान शामिल थे। बाद में संगठन का विस्तार हुआ और भारत तथा पाकिस्तान 2017 में पूर्ण सदस्य बने, जबकि ईरान और बेलारूस बाद में इसमें शामिल हुए।

प्रधानमंत्री मोदी बिश्केक में होने वाले 6वें वर्ल्ड नोमैड गेम्स के उद्घाटन समारोह में भी शामिल होंगे। वहीं, सम्मेलन के बाद SCO की अध्यक्षता अगले कार्यकाल के लिए पाकिस्तान को सौंपे जाने की उम्मीद है और 2027 का SCO शिखर सम्मेलन पाकिस्तान में प्रस्तावित है।